खम्मा घणी सा!
म्हारो नाम आदित्य वने है। म्हूं केकत जळगाव रो रहणेवाळो हूं। म्हारी मायड़ भाषा मारवाड़ी है। म्हाने म्हारी भाषा अर म्हारी संस्कृती घणी प्यारी लागे है।
म्हारो परिवार म्हारे वास्ते घणो खास है। म्हूं म्हारा परिवार रा सगळा माणसां सूं घणो प्रेम करूं हूं। म्हाने म्हारा गांव सूं घणो लगाव है। म्हारा गांव रा लोग प्रेम सूं अर मिलजुल ने रेवे है।
मारवाड़ी भाषा म्हारी पहचान है। म्हारी संस्कृती में बड़ां रो आदर करनो, छोटां सूं प्रेम करनो अर जरूरतमंदां री मदद करणी घणी जरूरी मान री जावे है।
म्हाने म्हारी मातृभाषा पर घणो गर्व है। म्हूं चाहूं हूं कि म्हारी मारवाड़ी भाषा अर संस्कृती हमेशा जीवित रेवे अर आवण वाळी पीढ़ी भी म्हारी भाषा ने सीखै।
जय मारवाड़! जय हिंद!